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गैंदाटोला क्षेत्र में शिक्षक समेत दो लोगों पर गंभीर आरोप, एक आरोपी गिरफ्तार, तो दूसरा फरार बताए जा रहे,

पीड़ित परिवार पर महिला जनप्रतिनिधि द्वारा समझौते का दबाव डालने के आरोपों ने खड़े किए कई बड़े सवाल,

प्रहरी न्यूज राजनांदगांव – गैंदाटोला थाना क्षेत्र के एक गांव से नाबालिग छात्रा के साथ लंबे समय से कथित शोषण का बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है, आरोप है कि उसी क्षेत्र के एक हायर सेकेंडरी स्कूल में पदस्थ शिक्षक सहित एक अन्य युवक द्वारा नाबालिग को कथित तौर पर डर और दबाव में रखकर लंबे समय तक उसका दैहिक एवं शारीरिक शोषण किया जाता रहा,

मामला तब सामने आया जब मानसिक एवं शारीरिक पीड़ा से परेशान नाबालिग ने आखिरकार अपने परिवार को पूरी बात बताई, इसके बाद परिवार पुलिस के पास पहुंचा और कार्रवाई की मांग की,

शिकायत के बाद तत्काल FIR क्यों नहीं?

आरोप है कि पीड़ित परिवार घटना की शिकायत लेकर तीन दिन पहले गैंदाटोला थाना पहुंचे थे, लेकिन तत्काल FIR दर्ज नहीं की गई,
इसी बीच मामले की जानकारी आरोपियों तक पहुंचने और उनके कथित रूप से राजनीतिक प्रभाव रखने वाले लोगों की शरण में जाने की बात सामने आई, आरोप है कि परिवार को मामले में समझौता करने के लिए दबाव का सामना करना पड़ा,

सबसे बड़ा सवाल यही है, नाबालिग से जुड़े गंभीर आरोप में शिकायत मिलने के बाद FIR दर्ज करने में तीन दिन क्यों लगे?

क्या इस दौरान किसी राजनीतिक या बाहरी दबाव के कारण पुलिस कार्रवाई प्रभावित हुई?

जनप्रतिनिधि की कथित भूमिका भी सवालों के घेरे में,

इस मामले में छुरिया क्षेत्र की रहने वाली और जिले के महत्वपूर्ण पद पर बैठी महिला जनप्रतिनिधि द्वारा पीड़ित परिवार पर समझौते के लिए दबाव बनाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं, बताया जा रहा है कि जब परिवार समझौते के लिए तैयार नहीं हुआ तो नाबालिग ने भी कथित रूप से सवाल उठाया कि यदि ऐसी परिस्थिति में मेरी जगह आपकी की अपनी बेटी होती, तो क्या ऐसी सलाह देतीं?

यह पूरा घटनाक्रम अब पुलिस की कार्यप्रणाली और कथित राजनीतिक हस्तक्षेप, दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है, तीन दिन बाद दर्ज हुई FIR
लगातार प्रयासों और न्याय की मांग के बाद आखिरकार गैंदाटोला पुलिस ने मामले में FIR दर्ज की,

उपलब्ध जानकारी के अनुसार एक आरोपी शिक्षक को गिरफ्तार किया गया है, जबकि दूसरा आरोपी फरार बताया जा रहा है,

SP की त्वरित कार्रवाई वाली छवि के बीच बड़ा सवाल,

जिले की पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा को त्वरित कार्रवाई के लिए जाना जाता है, ऐसे में उनके अधीन आने वाले थाने में नाबालिग से जुड़े इतने गंभीर आरोप की शिकायत के बावजूद FIR में कथित तीन दिन की देरी ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं?

❓ क्या पुलिस को शिकायत मिलते ही तत्काल FIR दर्ज नहीं करनी चाहिए थी?

❓ यदि पीड़ित परिवार पर वास्तव में समझौते का दबाव बनाया गया था, तो यह दबाव किसके इशारे पर था?

❓ क्या पुलिस अधिकारियों को किसी जनप्रतिनिधि या राजनीतिक व्यक्ति की ओर से फोन अथवा दबाव दिया गया था?

❓ तीन दिनों तक FIR लंबित रखने के पीछे वास्तविक कारण क्या था?

❓ क्या पुलिस इस कथित देरी की भी स्वतंत्र रूप से जांच करेगी?

पुलिस को, पीड़िता को न्याय के साथ व्यवस्था पर भी जवाब देना होगा,

यह सिर्फ एक परिवार की शिकायत नहीं, बल्कि नाबालिगों की सुरक्षा और पुलिस व्यवस्था की जवाबदेही से जुड़ा गंभीर सवाल है, यदि FIR में देरी या समझौते के लिए दबाव के आरोप भी सही पाए जाते हैं, तो इसकी जिम्मेदारी तय होना भी उतना ही जरूरी है,

अब निगाहें पुलिस की जांच पर हैं,

क्या जांच केवल आरोपियों तक सीमित रहेगी या FIR में देरी और कथित दबाव के पूरे घटनाक्रम की भी जांच होगी?

प्रहरी न्यूज का सवाल – नाबालिग न्याय मांगती रही, आख़िर तीन दिन तक FIR क्यों रुकी रही?

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