टीआई सहित संबंधितों पर कार्रवाई के बावजूद प्राचार्य व अन्य जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब?
कांग्रेस के तीन बड़े नेताओं की खामोशी क्यों? क्या पीड़ित आदिवासी बालिका के न्याय का मुद्दा राजनीतिक प्राथमिकता से बाहर है?
प्रहरी न्यूज छुरिया/गैंदाटोला,– गैंदाटोला क्षेत्र की नाबालिग आदिवासी बालिका से जुड़े संवेदनशील मामले में जहां सत्ता पक्ष के नेताओं तथा संबंधित आयोग द्वारा संज्ञान लिए जाने के बाद थाना प्रभारी सहित संबंधित जिम्मेदारों पर कार्रवाई की गई, वहीं मामले में अभी भी कुछ महत्वपूर्ण सवाल अनुत्तरित हैं, खासकर प्राचार्य सहित अन्य जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है,
सबसे बड़ा सवाल अब उस विपक्ष से है, जिसकी जिम्मेदारी केवल सदन या राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं, बल्कि जनता के संवेदनशील मुद्दों पर आवाज उठाने की भी है,
कांग्रेस के जिला अध्यक्ष विपिन यादव, खुज्जी विधानसभा क्षेत्र के विधायक भोलाराम साहू और पूर्व विधायक छन्नी चंदू साहू—इन तीनों नेताओं की इस मामले में अब तक की सार्वजनिक भूमिका पर सवाल उठना स्वाभाविक है,

छोटे-छोटे जनहित के मामलों में अधिकारियों के कार्यालयों, थाना परिसर, एसडीएम कार्यालय, कलेक्ट्रेट और एसपी कार्यालय तक पहुंचकर आवाज बुलंद करने वाली पूर्व विधायक छन्नी चंदू साहू इस गंभीर मामले में पीड़ित बालिका के न्याय के लिए अब तक सार्वजनिक रूप से उसी मजबूती के साथ सामने क्यों नहीं दिखाई दीं?
क्या आदिवासी समाज की एक नाबालिग बेटी का मामला इतना महत्वपूर्ण नहीं है कि विपक्ष की पूर्व विधायक उसके पक्ष में प्रशासन के सामने खड़ी हों?

इसी तरह कांग्रेस जिला अध्यक्ष विपिन यादव की चुप्पी भी सवालों के घेरे में है। जब मामला उनके ही गृह क्षेत्र से जुड़े ब्लॉक का है, तब कांग्रेस संगठन ने इस मामले को लेकर जिला स्तर पर क्या पहल की? क्या उन्होंने प्रशासन से जवाब मांगा? क्या पीड़ित परिवार से मुलाकात की? क्या दोषियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर कोई ज्ञापन, धरना या आधिकारिक पहल की गई?

और सबसे महत्वपूर्ण सवाल क्षेत्र के वर्तमान खुज्जी विधायक भोलाराम साहू से है, जिस विधानसभा क्षेत्र में यह संवेदनशील मामला सामने आया, वहां के जनप्रतिनिधि के रूप में उन्होंने पीड़ित बालिका के न्याय के लिए अब तक कौन-सा ठोस कदम उठाया?
विपक्ष की चुप्पी आखिर क्यों?
प्रहरी न्यूज़ किसी राजनीतिक दल का पक्ष या विरोध करने के लिए यह सवाल नहीं उठा रहा। सवाल केवल इतना है कि जब एक नाबालिग आदिवासी बालिका के न्याय का प्रश्न सामने हो, तब राजनीति से ऊपर उठकर जनप्रतिनिधियों और विपक्षी नेताओं को पीड़ित के साथ खड़ा नहीं होना चाहिए?

एक और गंभीर बिंदु सामने आता है, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती किरण रविन्द्र वैष्णव का नाम समझौता करवाने से संबंधित आरोपों/चर्चा में सामने आने की बात कही जा रही है। इस संबंध में यदि कोई आधिकारिक शिकायत, बयान या दस्तावेज उपलब्ध है तो उसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है, लेकिन सवाल यह भी है कि जिन नेताओं को इस पूरे प्रकरण पर सवाल उठाना चाहिए, वे इस पहलू पर भी चुप क्यों हैं?
क्या कांग्रेस के इन नेताओं ने जिला पंचायत अध्यक्ष से इस संबंध में सार्वजनिक रूप से जवाब मांगा?
क्या उन्होंने प्रशासन से पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग की?
क्या उन्होंने पीड़ित पक्ष से यह जानने का प्रयास किया कि वास्तव में क्या हुआ?
यदि नहीं, तो क्यों नहीं?
क्या राजनीतिक समीकरण न्याय के सवाल से बड़े हो गए हैं?
प्रहरी न्यूज़ किसी भी नेता पर बिना प्रमाण कोई आरोप सत्य के रूप में नहीं लगाता। लेकिन जनता के मन में उठ रहे सवालों को दबाना भी पत्रकारिता नहीं है।
इसलिए सीधा सवाल है…
क्या कांग्रेस के इन नेताओं की चुप्पी केवल राजनीतिक निष्क्रियता है, या इसके पीछे कोई राजनीतिक समीकरण है?
क्या सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच ऐसे कोई समीकरण हैं, जिनके कारण संवेदनशील मामलों में विपक्ष की आवाज कमजोर पड़ जाती है?
अगर ऐसा नहीं है तो तीनों नेता खुलकर सामने आएं और जनता को बताएं कि उन्होंने इस मामले में अब तक क्या किया है,
प्रहरी न्यूज़ की स्पष्ट भूमिका,
प्रहरी न्यूज़ का लक्ष्य किसी व्यक्ति को बदनाम करना नहीं, बल्कि पीड़ित नाबालिग बालिका को न्याय दिलाने की प्रक्रिया में अपनी पत्रकारिता की जिम्मेदारी निभाना है,
हम किसी भी राजनीतिक दल के साथ नहीं, न्याय के साथ खड़े हैं,
मामले में जिस-जिस स्तर पर कार्रवाई लंबित है, उसकी निष्पक्ष जांच हो, यदि किसी अधिकारी, कर्मचारी, संस्था या जनप्रतिनिधि की भूमिका की शिकायत सामने आती है तो उसकी भी कानून के अनुसार जांच हो, और यदि किसी पर लगाए गए आरोप गलत हैं तो संबंधित व्यक्ति को भी अपना पक्ष सार्वजनिक रूप से रखने का पूरा अधिकार है,
प्रहरी न्यूज़ कांग्रेस जिला अध्यक्ष विपिन यादव, विधायक भोलाराम साहू, पूर्व विधायक छन्नी चंदू साहू तथा जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती किरण रविन्द्र वैष्णव से इस पूरे मामले पर उनका स्पष्ट पक्ष जानना चाहता है,
क्योंकि सवाल सिर्फ राजनीति का नहीं है,
सवाल एक नाबालिग आदिवासी बेटी के सम्मान, सुरक्षा और न्याय का है,
और इस सवाल पर चुप्पी, चाहे सत्ता पक्ष की हो या विपक्ष की, जनता के सामने जवाबदेही है,
नोट: इस खबर में उठाए गए सवाल सार्वजनिक जवाबदेही और उपलब्ध/प्राप्त जानकारी के आधार पर हैं, संबंधित सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर है रख सकते है, नाबालिग पीड़िता की पहचान कानून एवं उसकी गरिमा की रक्षा के लिए सार्वजनिक नहीं की जा रही है,
मनभावन सिंह उइके – संपादक, प्रहरी न्यूज़, 9425566330,