प्रहरी न्यूज, खैरागढ़ छुईखदान गंडई – छत्तीसगढ़ प्रदेश की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संघों के विभिन्न संगठनों के प्रदेश अध्यक्ष और पदाधिकरियों ने संयुक्त मंच के बैनर तले अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नाम ज्ञापन सौंपा है।
इसके अलावा छत्तीसगढ़ प्रदेश के सभी संगठनों के पदाधिकारी ने आज छत्तीसगढ़ की महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े से मुलाकात कर उन्हें भी ज्ञापन सौंपा है। महिला एवम बाल विकास मंत्री ने संयुक्त मंच के बैनर तले पहुंचे पदाधिकारियों को आश्वस्त करते हुए कहा है कि राज्य सरकार की सभी योजनाओं को धरातल तक पहुंचने में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की बहुत अहम भूमिका रहती है, राज्य की भाजपा सरकार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के प्रति बहुत ही संवेदनशील है और आगामी दिनों में सभी मांगों पर विचार कर सभी मांगे राज्य सरकार अवश्य पूरी करेगी।
गौरतलब है कि आज छत्तीसगढ़ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संघों के प्रदेश अध्यक्ष सरिता पाठक, रूखमणि सज्जन, सुधा रात्रे, हेमा भारती, कल्पना चंद ने सयुक्त मंच के बैनर तले ज्ञापन में निम्नांकित मांग की है।
1 नियमितीकरण :- पंचायती राज के अधीन छत्तीसगढ़ राज्य में पंचायत कर्मी, शिक्षा कर्मी, स्वास्थ्य कर्मी, पंचायत सचिवों जैसे मनसेवियों को सरकार नीति बनाकर उन्हें नियमित (शासकीय कर्मचारी)कर चुकी है ,लेकिन हम आंगनवाड़ी कार्यकर्ता विगत 50 सालों से कार्यरत है,लेकिन हम आज भी मानसेवी हैं, आपसे हमारी अनुरोध है, कि सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिकाओं को नियमित करते हुए शासकीय कर्मचारी घोषित किया जावे।
2 जीने लायक वेतन:- शासकीय कर्मचारी घोषित करने तक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को ₹22000/ और सहायिका को ₹17000/जीने लायक वेतन स्वीकृत किया जावे।
3 सेवा निवृत्ति पश्चात पेंशन ग्रेजुवेटि:- 35-40 वर्ष विभाग की सेवा करने के बाद भी बुढ़ापे के समय जीवन व्यापन हेतु ना तो कोई पेंशन मिल रहा है और ना ही एक मुफ्त राशि कार्यकर्ता को ₹10000/और सहायिका को ₹8000/मासिक पेंशन और बुढ़ापे के शेष जीवन व्यापन के लिए कार्यकर्ता को 5 लाख और सहायिका को ₹4लाख एक मुफ्त ग्रेजुवेटि राशि प्रदान किया जावे।
4 महंगाई भत्ता :- महोदय विगत कुछ सालों में महंगाई में बेहताशा बढ़ोतरी हुई है, हमारा मानदेय बहुत ही कम है, जिसके कारण परिवार का गुजारा करना बड़ा मुश्किल हो गया है,मानदेय को महंगाई भत्ता के साथ जोड़ा जाय महंगाई भत्ता स्वीकृत किया जाय।
5 पदोन्नति बाबत :- वर्षों से अल्प मानदेय में कार्यरत आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सहायिकाओं को पदोन्नति के पद, रिक्त होने के बाद भी 50% का प्रतिबंध होने के कारण इन्हें इसका लाभ नहीं मिल रहा है 50% का बंधन को समाप्त किया जाय और कार्यकर्ता को बिना उम्र बंधन के वरिष्ठ क्रम में बिना परीक्षा के सुपरवाइजर के रिक्त शत प्रतिशत पद पर लिया जाय, इसी तरह 50% के बंधन के कारण सहायिका को भी कार्यकर्ता के पद रिक्त होने पर शत प्रतिशत वरिष्ठ क्रम में कार्यकर्ता के पद पर पदोन्नति किया जावे ।
6 अनुकंपा नियुक्ति :- कार्यकर्ता सहायिका के आकस्मिक मृत्यु होने पर परिवार के एक सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति दिया जावे ।
7 समूह बीमा योजना लागू करना:- भविष्य की सुरक्षा के लिये आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका को समूह बीमा योजना (GIS) में जोड़ा जावे, इस हेतु नीति निर्धारण किया जावे।
8 भवन किराया:-आंगनबाड़ी केंद्रों का भवन किराया वर्तमान में बहुत कम है ग्रामीण क्षेत्रों में 1000 और शहरी क्षेत्र में 3000 प्रतिमाह संशोधित किया जावे।
9 मानदेय नियमित पूर्ण रूप से समय पर प्राप्त नहीं हो रहा है केंद्र और राज्य सरकार के बजट से प्राप्त मानदेय एक साथ माह के 5 तारीख तक भुगतान किया जावे ।
10 टी.एच.आर.वितरण के विभागीय वर्तमान ब्यवस्था के अनुसार नया वर्जन के अनुसार किया जाना है.हितग्राही का आधार लेना है मोबाईल से ओटीपी लेना है ओटीपी लोड करने के बाद ही टीएचआर प्रदान किया जाना है इसमे कई ब्यवहारिक समस्या आ रही है.इस समस्या का निराकरण शासन प्रशासन स्तर पर कराने हेतु आग्रह करते हैं ।
11 सभी केंद्रों में गैस सिलेंडर और चूल्हा प्रदान किया जावे और इसकी नियमित रिफिलिंग की व्यवस्था सुगम बनाया जावे।
12 एक समय मे एक ही कार्य लिया जावे विभागीय कार्यो के अलावा और कोई कार्य ना लिया जावे। बी एल ओ सहित अन्य कामो के कारण विभागीय कार्यो को पूर्ण करने में कई सारे दिक्कते आ रही है
13 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका एक मानसेवी है और उनके ऊपर ड्रेस कोड लागू किया गया है जो उचित नही है वर्तमान मे जो साड़ी प्रदाय किया गया वह गुणवता विहिन है.उसकी क्वालिटी और कलर भी सही नही है।यदि ड्रेस अनिवार्य है तो इसके लिये अन्य विभाग जैसे हमे भी प्रति माह प्रत्येक कार्यकर्ता सहायिकाओ को 500/- धुलाई भत्ता दिया जावे।
14 विभाग मे आने वाली समस्या या अपनी आवश्यकताओ की जायज मांग को संघ पदाधिकारियो द्वारा उठाये जाने पर विभागीय अधिकारियो द्वारा समस्या का निराकरण करने के बजाय पदाधिकारियो को प्रताड़ित किया जाता है.इस प्रकार के कृत्यों पर रोक लगाई जाये और संघ के पदाधिकारियो के द्वारा सौपे गये समस्या के निराकरण हेतु अधिकारियो को निर्देशित किया जावे।
इसके अलावा छत्तीसगढ़ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका संगठन के पदाधिकारियों ने
1 महिला एवं बाल विकास विभाग के संचालक श्रीमान पदुम सिंह एल्मा जी की ओर से दिनांक 23.4.2025 को राज्य के सभी जिला कलेक्टरों को दिया गया आदेश हम सभी को विचलित करने वाला है, इसमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिकाओं की विभिन्न पंजीकृत यूनियनों/संघों के ब्लॉक, जिला एवं प्रांतीय पदाधिकारी पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है, क्योंकि ये यूनियनें हड़ताल, रैली, धरना आदि आयोजित करती है और इसके दौरान जो मांग करती है, उसे वर्तमान योजना प्रावधानों के तहत पूर्ण करना संभव नहीं है।
2 अपने न्यायोचित अधिकारों एवं अपने ऊपर होने वाले शोषण को रोकने का अधिकार, लोकतांत्रिक अधिकार है और यह मूल अधिकार के रूप में संविधान प्रदत्त है। इसके अलावा संगठन बनाना, संगठित होना, यूनियन या संघ बनाने का अधिकार भी लोकतांत्रिक संवैधानिक अधिकार की श्रेणी में आता है। यही नहीं बधिक यूनियन या संघ की गतिविधि में धरना, रैली, प्रदर्शन और हड़ताल करने का अधिकार भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया का एक भाग है। ये सभी कार्रवाइयां हमेशा विधिमान्य प्रक्रिया के पश्चात शासन प्रशासन से चर्चा के पश्चात ही आयोजित की जाती है।
3 विभाग द्वारा पत्र क्रमांक 105/आई सी डी एस-1/2023 24 दिनांक 28/07/2023 को जारी कर आदेशित किया गया था कि प्रदेश के आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका के विभागीय कार्य के अलावा अन्य विभागों के कार्य नहीं कराए जाने को कहा गया था, लेकिन आज हमसे अलग_अलग दो दर्जन से भी ज्यादा काम लिया जाता है, बिना ट्रेनिग का उसका सही मेहनताना भी नहीं मिलता। अनजाने में कोई त्रुटि होने पर बड़े अधिकारी बच जाते हैं और कार्यकर्ता को बर्खास्त कर दिया जाता है। जो आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओ के साथ अन्याय है।
ऐसी स्थिति में यूनियन या संध के ब्लॉक से लेकर प्रांतीय पदाधिकारियों पर कार्रवाई करने का आदेश अपने आप में कानून संगत नहीं जान पड़ता है। हो सकता है कि कुछ मांगे वर्तमान योजना प्रावधानों के अंदर संभव नहीं है, लेकिन मांग अगर न्यायोचित है, तो अपने अधिकारियों के समक्ष रखना हमारा कर्तव्य है। इन मांगों की पूर्ति करने के लिए प्रावधानों का निर्माण करना शासन का कार्य है. जिसके लिए हम लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाते रहते हैं।
संयुक्त मंच के पदाधिकारियों ने कहा है कि 2008 का नियुक्ति आदेश क्रमांक 183 की कंडिका 13 का हवाला देकर मौलिक अधिकारों के लिए शांति पूर्वक विरोध करने वाले यूनियन या संघो पर तत्काल कार्यवाही किये जाने का जो आदेश जारी किया गया है, उसे तत्काल निरस्त करने की मांग की है।
आज के इस ज्ञापन सौंपने वालों में….
सरिता पाठक सुधा रात्रि हेमा भारती कल्पना चंद लता तिवारी सौरा यादव सुलेखा शर्मा हाजरा खान सीमा बड़ोई शामिल थे।