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प्रहरी न्यूज राजनांदगांव, छुरिया – पांच दिन तक लगातार उठते सवालों और सामने आए ठोस सबूतों के बाद आखिरकार प्रशासन हरकत में आया, और छात्रावास अधीक्षक गुलाब गावरे को हटाकर उनके मूल शिक्षा विभाग में वापस भेज दिया है, उनकी जगह गोविन्द साहू को प्रभार सौंपा गया है,

❓ बड़ा सवाल,
क्या दोषी को सिर्फ हटाना ही न्याय है?

👉 बच्चों को भरपेट खाना नहीं मिला,

👉 अधीक्षक महीनों छात्रावास से गायब रहे,
👉 गरीब आदिवासी परिवारों के बच्चों से 1200-1200 सौ रुपये मेस के नाम पर वसूले गए,

👉 जब पूरे मामले के पुख्ता सबूत सामने हैं, तो क्या यह केवल प्रशासनिक कार्रवाई का मामला है, या फिर अपराधिक मामला दर्ज होना चाहिए?

❓ क्या मामले को दबाने की कोशिश हुई?

इतनी गंभीर अनियमितताओं के बावजूद देरी से हुई कार्रवाई कई सवाल खड़े करती है,

क्या इस पूरे मामले को लेन-देन के जरिए दबाने की कोशिश की जा रही थी?

नगर के प्रबुद्ध नागरिकों ने इस मामले पर दोषी (शिक्षक) अधीक्षक पर सख्त कार्रवाई की अपील की है,

❗ यह सिर्फ एक छात्रावास का मामला नहीं यह पूरे सिस्टम की जवाबदेही का सवाल है, अगर आज भी दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, तो ऐसे मामलों को बढ़ावा मिलेगा,

👉 क्या बच्चों के अधिकारों के साथ खिलवाड़ करने वालों पर FIR दर्ज होगी?

👉 क्या आर्थिक शोषण और लापरवाही के लिए सजा मिलेगी?

👉 या फिर मामला सिर्फ “हटा” देने तक ही सीमित रह जाएगा?

अब सबकी नजर प्रशासन पर है, देखना होगा कि आगे क्या होता है, न्याय या सिर्फ औपचारिकता?

बहरहाल विभाग अभी भी कड़ी कार्यवाही नहीं करना चाहती, और शिक्षक गुलाब गावरे को बचाने में लगी है, आदेश में हॉस्टल की घटना को छुपाकर कार्यवाही होना नहीं बता कर, प्रशासकीय व्यवस्था के तहत हटाने का आदेश जारी किया है, इससे सच को छुपाया नहीं जा सकता,

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