दो नावों में सवार नेताओं ने कराई भाजपा की किरकिरी, गांव-गांव में बढ़ी नाराज़गी, खुज्जी सीट पर फिर खतरे के संकेत,

प्रहरी न्यूज छुरिया – भाजपा की अंदरूनी गुटबाजी अब खुलकर सड़कों पर दिखाई देने लगी है, एक ओर गैंदाटोला तो दूसरी ओर नूनहाटोला सहित पांच गांवों के लोग शराब दुकान को लेकर आंदोलनरत रहे, उक्त आंदोलन में कांग्रेस की पूर्व विधायक छन्नी साहू खुलकर ग्रामीणों और महिलाओं के समर्थन में मैदान में उतर गईं,
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि जहां भाजपा के नेता आपसी खींचतान और गुटीय राजनीति में उलझे रहे, वहीं कांग्रेस ने मौके का पूरा फायदा उठाकर जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत कर ली,

ग्रामीणों का आरोप है कि भाजपा के कुछ तथाकथित नेता पूरे मामले में दोनों नावों में पैर रखकर राजनीति करते रहे, कभी गैंदाटोला पक्ष को यह कहकर समर्थन देते रहे कि आबकारी विभाग द्वारा दुकान का स्थान सही है? तो कभी अचानक रंग बदलकर धरना स्थल पहुंच महिलाओं के साथ खड़े होने का दावा करने लगे,
लेकिन आंदोलनकारी महिलाओं ने भी दो टूक जवाब देते हुए ऐसे नेताओं की बोलती बंद कर दी, एक महिला के तीखे शब्द “तोर बाई-बेटी के साथ अइसने छेड़खानी होतीस ता तब तोला कईसे लागही?” अब इलाके में चर्चा का विषय बने हुए हैं,
बताया जा रहा है कि इन नेताओं का झुकाव किसी एक गांव की ओर स्पष्ट नहीं था, बल्कि दोनों पक्षों को आपस में उलझाकर अपनी राजनीतिक जमीन बचाने की कोशिश की जा रही थी, यही नहीं जिला भाजपा नेतृत्व को भी कथित तौर पर गुमराह किया गया, जानकारी है कि इसी विवाद के बीच 19 मई 2026 मंगलवार को छुरिया और गैंदाटोला मंडल के वरिष्ठ नेताओं की संयुक्त बैठक साल्हेटोला स्थित मंडल अध्यक्ष निवास में आयोजित की गई, राजनीतिक सूत्रों की मानें तो यह बैठक भी गुटबाजी की भेंट चढ़ गई, आरोप है कि कई वरिष्ठ और प्रभावशाली नेताओं को जानबूझकर बैठक से दूर रखा गया, इनमें चंद्रिका प्रसाद डड़सेना, जगजीत सिंह भाटिया, श्रीमती मीना पुजेरी, श्रीमती भेष बाई साहू, सुरेंद्र सिंह भाटिया, शेखर भारद्वाज, राधेश्याम शर्मा, आत्माराम चंद्रवंशी और कांता साहू जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं,
अपमानित महसूस कर रहे इन नेताओं ने बाद में अलग रणनीति अपनाई, जिसने तथाकथित नेताओं की राजनीतिक चालों पर पानी फेर दिया, क्षेत्र में अब यह चर्चा तेज है कि यदि भाजपा की यही स्थिति रही तो आने वाले समय में भी खुज्जी विधानसभा सीट को बचाना पार्टी के लिए आसान नहीं होगा,
कई कार्यकर्ताओं के बीच यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या कुछ नेता अप्रत्यक्ष रूप से कांग्रेस को फायदा पहुंचाने में लगे हुए हैं?
बहरहाल शराब दुकान हटाने व यथावत रखने के मामले में जहां ग्रामीणों के आंदोलन का खुलकर समर्थन कर कांग्रेस की पूर्व विधायक श्रीमती छन्नी साहू जनता का भरोसा जीत गई, तो वही उसी क्षेत्र में जीतकर जिले में पहुंचने वाली जनप्रतिनिधि दंपति के चलते सत्ता दल पार्टी भाजपा की जमकर किरकिरी हो गई,