प्रहरी न्यूज छुरिया – ब्लॉक मुख्यालय छुरिया स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इन दिनों एक गंभीर सवाल के घेरे में है, स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं, मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं और बार-बार जिला अस्पताल रेफर किए जाने जैसी शिकायतों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि जीवनदीप समिति की नियमित बैठक आखिर क्यों नहीं हो रही है?
जानकारी के अनुसार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र छुरिया की जनभागीदारी/जीवनदीप समिति की पिछली बैठक 18 जनवरी को हुई थी, इसके बाद करीब आठ महीने बीत चुके हैं और सितंबर महीने का अंतिम दौर चल रहा है, लेकिन अब तक समिति की अगली बैठक नहीं होने की बात सामने आ रही है,
जीवनदीप समिति का उद्देश्य ही अस्पताल की व्यवस्थाओं, मरीजों की सुविधाओं और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े स्थानीय मुद्दों पर चर्चा कर उनका समाधान तलाशना है, ऐसे में इतने लंबे अंतराल तक बैठक नहीं होना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है,
शिकायतें हैं, लेकिन समाधान पर चर्चा कब?
छुरिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को लेकर समय-समय पर मरीजों और उनके परिजनों की ओर से विभिन्न तरह की शिकायतें सामने आती रही हैं। इनमें इलाज से संबंधित समस्याओं से लेकर मरीजों को छोटी-छोटी स्वास्थ्य समस्याओं में भी जिला अस्पताल रेफर किए जाने की शिकायतें शामिल हैं,
यदि इन शिकायतों में वास्तविकता है तो उनका समाधान स्थानीय स्तर पर ही खोजने की आवश्यकता है, लेकिन इसके लिए अस्पताल प्रबंधन, जनप्रतिनिधियों और समिति के सदस्यों के बीच नियमित संवाद जरूरी है,
सवाल यह भी है कि जब जीवनदीप समिति मौजूद है और उसमें जनप्रतिनिधियों के साथ सत्ता पक्ष तथा विपक्ष से जुड़े लोग भी शामिल हैं, तो फिर अस्पताल की व्यवस्थाओं और मरीजों की समस्याओं पर सामूहिक रूप से चर्चा क्यों नहीं हो रही?
सत्ता पक्ष के नेताओं की भूमिका पर भी सवाल,
समिति में सत्ता पक्ष से जुड़े नेताओं के सदस्य होने के बावजूद यदि अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती हैं, तो यह भी विचारणीय है कि स्थानीय स्तर पर इन समस्याओं को संबंधित विभाग तक कितनी मजबूती से पहुंचाया जा रहा है,
जनता ने जनप्रतिनिधियों को केवल राजनीतिक कार्यक्रमों तक सीमित भूमिका के लिए नहीं चुना है, अस्पताल जैसी मूलभूत सुविधा से जुड़े सवालों पर भी उनकी सक्रियता अपेक्षित रहती है,
विपक्ष के विधायक की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल,
खुज्जी विधानसभा क्षेत्र के विधायक भोलाराम साहू जीवनदीप समिति के अध्यक्ष हैं, ऐसे में समिति की बैठक लंबे समय से नहीं होने और स्वास्थ्य केंद्र से जुड़ी शिकायतों के बीच विपक्ष के विधायक की भूमिका को लेकर भी सवाल उठना स्वाभाविक है,
विपक्ष का काम केवल सदन में सरकार को घेरना ही नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र की जनता से जुड़े स्थानीय मुद्दों को भी मजबूती से उठाना है, यदि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों को परेशानी हो रही है या स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही हैं, तो इन मुद्दों को समिति के माध्यम से प्रशासन के सामने रखना और उनके समाधान की पहल करना भी जरूरी है,
आखिर मरीज अपनी समस्या लेकर जाएं तो जाएं कहां?
छुरिया जैसे ब्लॉक मुख्यालय में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आम लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुविधा है, ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों से लोग इलाज की उम्मीद लेकर यहां पहुंचते हैं,
ऐसे में जब मरीजों को पर्याप्त उपचार न मिलने, बार-बार रेफर किए जाने या अन्य व्यवस्थागत समस्याओं की शिकायत हो, तो उनकी बात सुनने और समाधान के लिए प्रभावी मंच होना चाहिए,
जब जीवनदीप समिति की बैठक ही समय पर नहीं होगी, तो मरीजों की समस्याओं पर चर्चा और उनका समाधान कैसे होगा?
यह सवाल केवल किसी एक राजनीतिक दल से नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष, विपक्ष, अस्पताल प्रबंधन और संबंधित स्वास्थ्य विभाग सभी से है,
जनता यह जानना चाहती है कि आखिर 18 जनवरी के बाद जीवनदीप समिति की बैठक क्यों नहीं हुई? अगली बैठक कब होगी? और क्या बैठक में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं तथा मरीजों की लगातार सामने आ रही शिकायतों पर ठोस चर्चा होगी?
अब जरूरत है कि जिम्मेदार जनप्रतिनिधि और स्वास्थ्य विभाग इस मामले को गंभीरता से लें और समिति की बैठक बुलाकर अस्पताल की वास्तविक स्थिति, मरीजों की समस्याओं तथा स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार को लेकर ठोस निर्णय लें,
क्योंकि सवाल राजनीति का नहीं, सवाल छुरिया के आम मरीज और उसके इलाज का है,