छुरिया – विकास खंड के प्रमुख ग्राम गैंदाटोला के समीपस्थ ग्राम खोराटोला निवासी एवं अंचल के सुप्रसिद्ध लोक कलाकार ओमन सिंग पोर्ते का लगभग 55 वर्ष के आयु में गत 21जुलाई को बीमारी के चलते दुःखद निधन हो गया। पोर्ते जी अपने पीछे पत्नि जेठीबाई एवं तीन पुत्रों खिलेश्वर, राजेश एवं रवि सहित भरा- पूरा परिवार छोड़ कर चला गया। साथी कलाकार उनके तीजनहान कार्यक्रम में 23 जुलाई को सामिल होकर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की एवं शोकाकुल परिवार को ढांढस बंधाया।
जानकारी अनुसार ओमन सिंग पोर्ते छुरिया एवं गैंदाटोला अंचल के सुप्रसिद्ध छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक लोक कलामंच मयारू माटी कोलयारी एवं पहाती के सुकवा केशोटोला के प्रमुख लोक कलाकारों में से एक प्रमुख कलाकार था। पहले वो मयारू माटी कोलयारी एवं बाद में पहाती के सुकवा केशोटोला के माध्यम से छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश एवं उड़िसा के विभिन्न मंचों पर गायक, हारमोनियम वादक एवं हास्यकलाकार के रूप में अपनी कला प्रतिभा का प्रदर्शन कर छत्तीसगढ़ी लोक कला- संस्कृति का प्रचार प्रसार करता था ।
शोकाकुल परिवार को संबोधित करते हुए तहसील ध्रुव गोंड़ समाज छुरिया के अध्यक्ष, मयारू माटी के संस्थापक एवं संचालक शेरसिंह गोंड़िया कहा कि ओमन सिंग पोर्ते हमारे संस्था के आधार स्तम्भों में से एक थे। पोर्ते जी एक अच्छा लोककलाकार के साथ- साथ एक अच्छा सामाजिक कार्यकर्ता एवं खोराटोला के गणमान्य नागरिक भी थे।
ब्लाक कोयतुर गोंड़ समाज छुरिया-डोंगरगढ़ के अध्यक्ष एवं पहाती के सुकवा के उदघोषक दिनेश कुरेटी दिलेर ने कहा कि ओमन सिंग पोर्ते जी के साथ हमें 25 साल तक कला के क्षेत्र में काम करने का अवसर प्राप्त हुआ। पोर्ते जी हंसमुख स्वभाव के सुप्रसिद्ध एवं बहुमुखी प्रतिभा के धनी व अच्छा लोककलाकार था। जिनके पास रोते हुए इंसान को हंसाने का कला था लेकिन अब पोर्ते जी हम सभी को रूलाकर चले गए।
पहाती के सुकवा के संस्थापक शरद कुमार ठाकुर ने कहा कि ओमन सिंग पोर्ते जी के निधन से हमारी लोक कला संस्था सहित छत्तीसगढ़ी कला जगत की अपूर्णीय क्षति हुई है।जिसकी भरपाई नहीं हो सकती। ऐसे कलाकार हजारों में एक होते हैं। पोर्ते जी का दिवंगत होना परिवार, समाज व कला जगत के लिए अत्यंत ही दुःखद है। इस अवसर पर प्रमुख रूप से रामकृष्ण चन्द्रवंशी,भोलाराम नेताम, गुमान मंडावी, हिरेन्द्र साहू,कोमल साहू, द्वारका प्रसाद मंडावी, राजेश यादव, अनुप मंडावी आदि सहित परिवार, समाज एवं गांव के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित थे।