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छुरिया – गत दिनों सर्वआदिवासी समाज ग्राम इकाई एवं कोयतुर गोंड़ समाज,ध्रुव गोंड़ समाज व कंवर समाज बूचाटोला,पड़रामटोला एवं गेरूघाट के संयुक्त तत्वावधान में स्थानीय स्तर पर मनमोहक आदिवासी नृत्य की शानदार प्रस्तुति के साथ तीनों गांवों में विश्व आदिवासी दिवस समारोह हर्षोल्लास के साथ बड़े धूमधाम से मनाया गया।

तीनों गांवों के कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला पंचायत सभापति ललिता कंवर थे। अध्यक्षता सआस के जिला संरक्षक एवं कोयतुर गोंड़ समाज ब्लाक इकाई छुरिया-डोंगरगढ़ के अध्यक्ष दिनेश कुरेटी दिलेर ने किया।विशेष अतिथि सरपंच द्वय पवनबाई ध्रुर्वे बूचाटोला एवं नीलम बाई पुजेरी केशोटोला,जनपद सदस्य मीनाबाई कंवर पड़रामटोला,उपसरपंच रूपनाथ हारमें बूचाटोला, समाज प्रमुख गण दिलीप कोरेटी,ब्रम्हूलाल कंवर, भागवत पुरामे,डी.आर.चन्द्रवंशी, संतोष कुमार उइके,देशराम कोर्राम, हेमंत कुमार चन्द्रवंशी,मोहन लाल चन्द्रवंशी,बेदराम मंडावी एवं धनसाय मंडावी आदि रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ बिरसा मुंडा, वीरनारायण सिंह,दुर्गावती,सीताराम कंवर, गैंदसिंह नायक,गुंडाधुर सहित समस्त आदिवासी शहीदों के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर सेवा अर्जी के साथ किया गया पश्चात अतिथियों का स्वागत किया गया।
सभा को संबोधित करते हुए मुख्यअतिथि ललिता कंवर ने कहा कि हम सभी आदिवासी प्रकृति के पुजारी एवं जल-जंगल-जमीन के रक्षक हैं।दिनों दिन जल-जंगल-जमीन खत्म होती जा रही है जोकि हमारे आदिवासी समाज के लिए अत्यंत ही चिन्तनीय है। प्रकृति एवं संस्कृति को बचाना हम आदिवासियों की प्रथम जिम्मेदारी है। आदिवासी समाज,आदिवासी संस्कृति एवं आदिवासियों के जीवन दायिनी जल-जंगल-जमीन को समूल नष्ट करने का उच्च स्तरीय षड्यंत्र किया जा रहा है जिसे हम बर्दाश्त नहीं करेंगे।आदिवासी समाज को जागरूक होकर अपने अस्तित्व के साथ प्रकृति एवं संस्कृति को बचाने के लिए लोकतांत्रिक ढंग से वृहद रूप में संघर्ष करने की जरूरत है। हमें अपने प्राचीन सेवा अर्जी के तरीके एवं रूढ़ी-प्रथा-परम्परा को मूल रूप में बनाये व बचाय रखना होगा।
अध्यक्ष की आसंदी से दिनेश कुरेटी दिलेर ने कहा कि आदिवासी अपने गांव एवं आदिवासी अंचल के मूल निवासी होने के कारण अपने गांव तथा अपने अंचल के प्राकृतिक संसाधनों के प्रथम हकदार है।आदिवासी समाज को उच्च स्तरीय शिक्षा ग्रहण कर समाज के मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रशासनिक अधिकारी के रूप में उच्च पद पर आसीन होना होगा।जीवन स्तर को सुधारने के लिए अपने सोच एवं समझ को भी बढ़ाने की आवश्यकता है।श्री कुरेटी ने सभी आदिवासी समाज से अपने बच्चों को उच्च स्तरीय शिक्षा के लिए संशाधन उपलब्ध कराने के साथ-साथ अच्छे संस्कार देने का आव्हान किया।
सभा को सभी विशेष अतिथियों ने संबोधित कर विश्व आदिवासी दिवस समारोह मनाने के उद्देश्य से अवगत कराया। स्वागत भाषण दिलीप कोरेटी,मोहन चन्द्रवंशी एवं तीरथ मंडावी,संचालन एवं आभार प्रदर्शन भगवान दास पुरामें,देशराम कोर्राम एवं नेहरू मंडावी ने किया।इस मौके पर स्कूल एवं काॅलेज के छात्राओं व लोक कलाकारों ने मनमोहक आदिवासी नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी।
इस अवसर पर घनश्याम कोमरे, चन्द्रकांत पुरामें,धनसाय नेताम,खिलेश्वर कंवर, आलेन्द्र कुमार चन्द्रवंशी, मनीराम कंवर,प्रभुराम कंवर, रहिपाल चन्द्रवंशी, उत्तम मरकाम, समुंद कंवर, रामगुलाल कंवर, योगेश मरकाम,पास कुमार मंडावी, सियाराम कोर्राम,चंदरसिंग पुरामें, भावना कोरेटी, शारदा बाई कोरेटी,मीना बाई हारमें,सविता पुरामें, अंबिका सलामें, प्रेमजीत कोरेटी एवं रूपेश कल्लो आदि सहित आदिवासी कोयतुर गोंड़ समाज,आदिवासी ध्रुव गोंड़ समाज एवं आदिवासी कंवर समाज के लोग सैंकड़ों की संख्या में उपस्थित थे। छुरिया विकास खंड के कल्लूबंजारी,मासूल,गिधवाभंवर,बम्हनीचारभांटा,पैरीटोला,जोब, बेंदाड़ी, झाड़ीखैरी,खोभा,पेण्ड्रीडीह,गर्रापार, टेकेहर्रा,पदगुड़ा,खुर्शीपार,तेलगान,बिटाल,कोलयारी,नांदियाखुर्द आदि गांवों में भी विश्व आदिवासी दिवस समारोह हार्षोल्सास के साथ मनाया गया।

By admin

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