प्रहरी न्यूज राजनांदगांव – राजनांदगांव जिले में क्या कानून व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर पुलिस विभाग के भीतर ही असंतोष बढ़ता जा रहा है?
क्या अधीनस्थ कर्मचारियों की भावनाओं को दरकिनार कर सख्ती थोपना सही तरीका है?
क्या, फैसले बिना जांच के, लिए जा रहे हैं?
और सबसे बड़ा सवाल, क्या इससे निष्पक्ष कानून व्यवस्था, प्रभावित हो रही है,
राजनांदगांव जिले की एसपी प्रदेश की सबसे चर्चित महिला आईपीएस अधिकारी अंकिता शर्मा के कार्यकाल को लेकर पुलिस विभाग के भीतर से ही कई सवाल उठते नजर आ रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, अधीनस्थ अधिकारी और कर्मचारी खुद को दबाव में महसूस कर रहे हैं।
बताया जा रहा है कि:
आदेशों का पालन किसी भी हालत में करवाने का दबाव है,
कर्मचारियों की व्यक्तिगत परिस्थितियों और भावनाओं को नजरअंदाज किया जा रहा है,
शिकायत आने पर तुरंत कार्रवाई होती है, लेकिन क्या हर बार निष्पक्ष जांच होती है, यह सवाल बना हुआ है,
कार्रवाई या जल्दबाजी?
कुछ कर्मचारियों का कहना है कि…
बिना पूरी जांच के ट्रांसफर, लाइन अटैच जैसी कार्रवाइयाँ हो रही हैं,
कई लोग खुद को “बिना गलती सजा भुगतने वाला” मान रहे हैं,
थाना प्रभारियों पर सख्ती?
सूत्रों के मुताबिक…
थाना प्रभारी स्वतंत्र निर्णय लेने में असहज महसूस कर रहे हैं,
एफआईआर दर्ज करने से लेकर अन्य कार्रवाई तक, हर चीज के लिए अनुमति जरूरी बताई जा रही है,
बिना अनुमति कदम उठाने पर कार्रवाई का डर बना हुआ है,
बड़ा सवाल…
अगर थाना स्तर पर निर्णय लेने की स्वतंत्रता सीमित हो जाए, तो क्या निष्पक्ष और त्वरित न्याय संभव है?
दो चेहरे वाली छवि?
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि…
मैडम का बाहर से सख्त और सकारात्मक छवि दिखाना है…
लेकिन अंदरूनी सिस्टम में मैडम के प्रति असंतोष है,
अब जब ऐसी बात लिकल कर सामने आ ही रही है तो सवाल उठना भी जरूरी है…
👉 क्या सख्ती और संवेदनशीलता के बीच संतुलन बन रहा है?
👉 या सिस्टम के भीतर ही तनाव बढ़ रहा है?
बहरहाल जो बाते सूत्रों से सामने आई है, उसे जनता और पाठकों तक पहुंचाना एक पत्रकार की जिम्मेदारी थी, जो निभाया गया है, बाकी इस खबर पर आप पाठकों की क्या प्रतिक्रिया होगी या है, वो देखने वाली होगी,