प्रहरी न्यूज छुरिया (राजनांदगांव) – जहां खेतों में चना की खेती सीमित जमीन पर रही, वहीं कागज़ों में उसका रकबा कई गुना बढ़ गया, और यहीं से शुरू एक ऐसा खेल, जिसने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं,
छुरिया तहसील के ग्राम खोभा में सामने आए आंकड़े सिर्फ एक गलती नहीं, बल्कि एक बड़े घोटाले की ओर इशारा हैं?

👉 रबी फसल 2024–25 के आधिकारिक आंकड़ों और रिपोर्ट मे, ग्राम खोभा के 133 खसरा के कुल 45.485 हेक्टेयर कृषि भूमि पर चना की खेती की गई,
👉 इसमें से 10.659 हेक्टेयर सिंचित और 34.826 हेक्टेयर असिंचित भूमि शामिल है,
वही बीमा के आंकड़े…

👉 प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 2024-25 में छुरिया तहसील के ग्राम खोभा के, “कृषि भूमि 281.49172, हेक्टेयर” का बीमा किया गया!
जिसका बीमा राशि (5871840.96) अनठावन लाख इकहत्तर हजार आठ सौ चालीस रुपए छयानबे पैसे है,

यानी जितनी जमीन पर खेती हुई, उससे कई गुना ज्यादा क्षेत्र का बीमा किया गया, लगभग 236 हेक्टेयर का अंतर,
अब ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ये 236 “अतिरिक्त” हेक्टेयर कृषि भूमि किस–किस किसानों का है, जिनके भूमि और नाम से चना फसल का बीमा हुआ?
कागज़ी खेती का खेल या सुनियोजित साजिश?
यह मामला अब सिर्फ आंकड़ों का अंतर नहीं है, बल्कि यह संकेत देता है, कि कहीं सुनियोजित तरीके से फर्जी बीमा कर, सरकारी बीमा राशि गबन करना तो नहीं?
यह बिना किसी अंदरूनी मिलीभगत के इतना बड़ा अंतर संभव नहीं है?
👉 2024-25 रबी फसल ग्राम खोभा की अनावरी रिपोर्ट मे कितना हेक्टेयर में चना और कितने मे धान है?
👉 क्या किसी ने किसानों के नाम पर बिना जानकारी के बीमा करवा दिया?
👉 क्या रिकॉर्ड में हेर-फेर कर फर्जी रकबा बढ़ाया गया?
👉 या फिर यह पूरा खेल सिस्टम के अंदर बैठकर खेला गया?
इन सवालों के जवाब अब जांच के बाद ही सामने आएंगे,
क्या ऐसे भ्रष्टाचार का इतिहास खुद को दोहरा रहा है?
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह पहली बार नहीं है,
छुरिया तहसील के ही ग्राम आमगांव में पहले भी ऐसा ही मामला सामने आ चुका है, जहां केले की फसल वाले खेतों में चना का बीमा दिखाकर लाखों रुपये का घोटाला किया गया था, उस समय भी किसानों को इसकी भनक तक नहीं लगी थी।
जिसका जांच में खुलासा हुआ कि सीएससी सेंटर संचालक, ग्राम सेवक और अन्य लोगों की मिलीभगत से यह फर्जीवाड़ा किया गया था, जिसके बाद संबंधित ग्राम सेवक, सीएससी सेंटर संचालक और इसमें शामिल अन्य लोगो को जेल भी हुआ,
👉 अब सवाल उठ रहा है, क्या आमगांव की तरह ग्राम खोभा में भी वही पुराना खेल दोहराया गया?
👉 क्या किसानों के नाम पर हुआ है खेल, और किसान है अनजान,
सबसे गंभीर पहलू यह है कि अक्सर ऐसे मामलों में जिन किसानों के नाम पर बीमा होता है, उन्हें इसकी जानकारी भी नहीं होती,
अगर ग्राम खोभा में भी ऐसा ही हुआ है, तो यह न सिर्फ आर्थिक घोटाला है, बल्कि किसानों के अधिकारों के साथ खुला धोखा भी है,
मामला सामने आने के बाद अब निगाहें जिला प्रशासन और कलेक्टर पर टिक गई हैं,
ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों की मांग है कि इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके,
👉 क्या प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेकर कार्रवाई करेगा?
👉 या, यह मामला भी कागज़ों में दबकर रह जाएगा?
सवाल, जो सबके मन में है…
जब 45 हेक्टेयर खेतो में चना की खेती थी, तो 281 हेक्टेयर का बीमा कैसे हो गया?
👉 ये गलती है… या घोटाले की पटकथा?
टीप:- भूमि के हेक्टेयर संबंध में जो आंकड़ा दर्शित है वह उसके मेन आंकड़ा है, जैसे 45.485 हेक्टेयर है, उसे 45 हेक्टेयर और जो 281.49172 हेक्टेयर है, उसे 281 लिखा गया है, ताकि पाठकों के पड़ने समझने मे सुविधा हो सके, बाकी फिक्स आंकड़े भी दर्शित है,