प्रहरी न्यूज राजनांदगांव छुरिया, – जनता की सुविधा के लिए बनाए गए नवीन विश्राम गृह का निर्माण कार्य पूरा हुए लगभग एक वर्ष बीत चुका है, लेकिन आज तक उसका अधिकृत उद्घाटन नहीं हो सका है। यह मामला अब केवल एक भवन के उद्घाटन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोक निर्माण विभाग, मंत्री और सरकार की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर रहा है,

सबसे हैरानी की बात यह है कि यह विश्राम गृह पहले भी विवादों और अखबारों की सुर्खियों में रह चुका है,
जब पूर्व विधायक श्रीमती छन्नी साहू ने अपने समर्थकों के साथ मिलकर अनाधिकृत रूप से नारियल फोड़कर विश्राम गृह का उद्घाटन कर दिया था,

हालांकि उस समय प्रशासन ने इसे अधिकृत शासकीय उद्घाटन नहीं माना,
लेकिन अब एक साल से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी जब सरकार और विभागीय प्रशासन इस पर कोई कदम नहीं उठा पाए हैं, तो लोगों के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि,
क्या प्रशासन ने चुपचाप पूर्व विधायक की ‘नारियल वाले उद्घाटन’ को ही मान्यता दे दी है?
जनता पूछ रही, आखिर देरी किस बात की?
स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जब भवन पूरी तरह तैयार है, और जनता की जरूरत के लिए बनाया गया है, तो उसका उद्घाटन आखिर क्यों टाला जा रहा है,
क्या विभागीय मंत्री, विभाग और सत्तादल के नेताओं के पास समय नहीं है, या फिर जिम्मेदारी से बचने का बहाना बनाया जा रहा है?
इस पूरे घटनाक्रम ने भाजपा नेताओं, शासन और विभागीय प्रशासन की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
लोगों का कहना है कि अगर एक साल में भी उद्घाटन नहीं हो सकता, तो यह सीधे-सीधे प्रशासनिक उदासीनता और राजनीतिक लापरवाही का उदाहरण है,
पूर्व विधायक की ‘अनाधिकृत उद्घाटन’ अब बन रहा चर्चा का विषय,
पूर्व विधायक श्रीमती छन्नी साहू द्वारा किया गया अनाधिकृत उद्घाटन उस समय भले ही विवादित रहा हो, लेकिन अब जब अधिकृत उद्घाटन वर्षों से अटका हुआ है, तो लोगों के बीच व्यंग्यात्मक चर्चा होने लगा है, कि…….
“सरकारी उद्घाटन तो हुआ नहीं, कम से कम पूर्व विधायक श्रीमती छन्नी साहू का नारियल ही काम आ गया,

यह स्थिति शासन और प्रशासन के लिए किसी किरकिरी से कम नहीं है,
क्योंकि जिस काम को औपचारिक रूप से कुछ घंटों में पूरा किया जा सकता था, वह अब एक साल से ज्यादा समय से तारीखों में उलझा हुआ है,
अब जिम्मेदारी तय करने की मांग तेज,
स्थानीय स्तर पर अब यह मांग तेज हो रही है कि इस देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय हो,
जनता का साफ कहना है कि अगर सरकार जनता की सुविधा के लिए बनाए गए भवन का उद्घाटन समय पर नहीं कर सकती, तो विकास के बड़े-बड़े दावे केवल कागजी साबित होंगे,