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छत्तीसगढ़ सरकार का जबरन धर्म परिवर्तन पर कड़ा कानून भी चर्चा में,

प्रहरी न्यूज, विशेष रिपोर्ट 👇

नई दिल्ली, रायपुर – धर्म परिवर्तन और आरक्षण को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत माननीय सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण रुख अपनाते हुए स्पष्ट संकेत दिया है, कि अनुसूचित जाति (SC) के व्यक्ति द्वारा धर्म परिवर्तन करने की स्थिति में उसे SC/ST वर्ग के तहत मिलने वाले आरक्षण और अन्य सुविधाओं का लाभ स्वत: जारी नहीं रह सकता,

सर्वोच्च अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अनुसूचित जाति का दर्जा ऐतिहासिक सामाजिक भेदभाव और विशेष धार्मिक-सामाजिक परिस्थितियों के आधार पर तय किया गया है,

यदि कोई व्यक्ति अपना मूल धर्म बदलकर किसी अन्य धर्म को अपनाता है, तो उसे उसी आधार पर आरक्षण का लाभ देना संविधान की मूल भावना के विपरीत माना जाएगा,

इस फैसले ने देश के एससी/एसटी/ओबीसी वर्ग के लोगों को साफ संदेश दिया है, कि जो अपने धर्म को छोड़कर ऐसे धर्म में चले जाते है, जहां उनके अपने मूल धर्म की परंपरा, जाति व्यवस्था और रीति रिवाज न चलता हो, न मानते हो, वैसे व्यक्ति को आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता, आरक्षण का लाभ उन्हीं को मिलेगा, जो अपने मूल धर्म में रहे जाति, रीति रिवाज को माने,

माननीय सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस लिए स्वागत योग्य,

यह मामला आंध्रप्रदेश का पादरी चिंथाड़ा आनंद द्वारा लगाए गए याचिका को लेकर है, जहां माननीय सुप्रीमकोर्ट ने आंध्रप्रदेश हाईकोर्ट की उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमे पादरी चिंथाड़ा आनंद ने अपने ऊपर जातिगत, भेदभाव गाली गलौज, (एससी/एसटी अत्याचार अधिनियम) के तहत केस दर्ज करवाया था,

जिस पर आंध्रप्रदेश हाईकोर्ट ने मई 2025 को अपने फैसले में यह कहते हुए एफआईआर रद्द कर केस खारिज कर दिया, कि चिंथाडा आनंद ईसाई धर्म अपना चुके है, वह अब दलित श्रेणी में नहीं आते, इस लिए वे अब इस विशेष कानून का लाभ नही ले सकते,

इस फैसले के खिलाफ पादरी चिंथाड़ा आनंद ने देश के सर्वोच्च न्यायालय माननीय सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर किया था, माननीय सुप्रीम कोर्ट ने आंध्रप्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को सही मानते हुए फैसला बरकार रखा और पादरी की याचिका खारिज कर दिया,

छत्तीसगढ़ में भी जबरन धर्म परिवर्तन पर सख्त कानून,

इधर छत्तीसगढ़ में भी धर्म परिवर्तन के मामलों को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है, राज्य में जबरन या लालच देकर धर्म परिवर्तन कराने की घटनाओं को रोकने के लिए “छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम” (संशोधन) के तहत कड़े प्रावधान लागू किए गए हैं,

नए प्रावधानों के अनुसार, किसी व्यक्ति को दबाव, प्रलोभन या धोखे से धर्म परिवर्तन कराने पर कठोर सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है, साथ ही, धर्म परिवर्तन से पहले प्रशासन को सूचना देने और अनुमति की प्रक्रिया को भी अनिवार्य बनाया गया है, ताकि अवैध या जबरन धर्म परिवर्तन पर प्रभावी रोक लगाई जा सके,

बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को लेकर आम नागरिकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है, अधिकतर लोगों ने माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत करते हुए, इसे व्यवस्था में स्पष्टता लाने वाला और कानून के अनुरूप सही कदम बताया है, लोगों का मानना है कि इस तरह के फैसलों से समाज में नियमों को लेकर भ्रम की स्थिति खत्म होगी, और कानून का पालन सुनिश्चित हो सकेगा,

By admin

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