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केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बी. संजय कुमार ने माओवादी संगठनों को साफ संदेश दिया है कि उनके आत्मसमर्पण के अलावा उनसे कोई बातचीत नहीं होगी। इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने तेलंगाना के सीएम और पूर्व सीएम के साथ-साथ कांग्रेस पार्टी पर भी निशाना साधा है।

No question of talks with Maoists, says Union Minister Bandi Sanjay Kumar, News in Hindi
प्रहरी न्यूज दिल्ली – केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बी. संजय कुमार ने रविवार को साफ कहा कि माओवादियों के साथ किसी भी तरह की शांति वार्ता का कोई सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि सीपीआई (माओवादी) एक प्रतिबंधित संगठन है और इसके सदस्यों को अगर मुख्यधारा में आना है तो पहले उन्हें हथियार डालकर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करना होगा। करीमनगर में पत्रकारों से बात करते हुए संजय कुमार ने कहा,’यह एक प्रतिबंधित संगठन है, और इससे बातचीत करने का कोई सवाल ही नहीं उठता।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री पर तंज
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने हाल ही में कहा था कि उनकी सरकार नक्सलवाद को सामाजिक नजरिए से देखती है, न कि सिर्फ कानून-व्यवस्था की समस्या के रूप में। इस पर बी. संजय कुमार ने सवाल उठाया, ‘जो लोग बंदूकें लेकर हिंसा कर रहे हैं, उनसे कैसे सामाजिक नजरिए से बात की जा सकती है?’ उन्होंने यह भी याद दिलाया कि कांग्रेस सरकार ने ही माओवादियों पर प्रतिबंध लगाया था और पूछा कि क्या रेवंत रेड्डी में अब इतना साहस है कि वह इस बैन को हटाने की हिम्मत दिखाएं?केसीआर और कांग्रेस पर निशाना
बीआरएस प्रमुख के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) ने केंद्र से ‘ऑपरेशन कागर’ रोकने की मांग की थी। उनका आरोप है कि इस अभियान में आदिवासी और युवा मारे जा रहे हैं। इस पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अब कांग्रेस और बीआरएस आपस में मुकाबला कर रहे हैं कि कौन माओवादियों के पक्ष में केंद्र से शांति वार्ता की मांग करेगा।

माओवादियों पर गंभीर आरोप 
केंद्रीय मंत्री ने माओवादियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ‘इन्हीं माओवादियों ने लैंडमाइंस बिछाकर निर्दोष लोगों, आदिवासियों, सुरक्षाबलों और कांग्रेस, टीडीपी, भाजपा के नेताओं की हत्या की थी।’ उन्होंने सवाल किया, ‘ऐसे हिंसक संगठन से कोई भी सरकार शांति वार्ता कैसे कर सकती है? जब ये निर्दोषों की हत्या कर रहे थे, तब किसी भी राजनीतिक दल या सामाजिक संगठन ने इनके खिलाफ आवाज नहीं उठाई।

ऑपरेशन कागर — अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई
बता दें कि, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की सीमा पर 21 अप्रैल से माओवादियों के खिलाफ एक बड़ा अभियान ‘ऑपरेशन कागर’ चल रहा है। इसमें करीब 24,000 सुरक्षाबल शामिल हैं, जैसे कि डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड), बस्तर फाइटर्स, स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ), सीआरपीएफ और कोबरा कमांडो। यह छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में अब तक की सबसे बड़ी एंटी-नक्सल कार्रवाई मानी जा रही है।केंद्र का लक्ष्य — 2026 तक नक्सलवाद का खात्मा
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा। वहीं इस ऑपरेशन के बीच माओवादियों ने भी बयान जारी कर केंद्र और छत्तीसगढ़ सरकार से कार्रवाई रोकने और शांति वार्ता करने की मांग की है। माओवादियों का कहना है कि ‘ऑपरेशन कागर’ उनके ‘क्रांतिकारी आंदोलन’ को खत्म करने की साजिश है।

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